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शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2013

महा रास लीला ॐ श्री राधे कृष्णा बोले

भगवान् श्री कृष्णा की सोलह कलाओं को लेकर आती हैं शरद पूर्णिमा 
प्रतिदिन हम प्रार्थना  में गाया करते हैं ,तन ,मन ,धन ,सब हैं तेरा क्या 
लागे मेरा,,,इसका अर्थ यही हैं ,हे ईश्वर तू तो आत्मा में समाया  हुआ हैं ,,
और ये शरीर ,मन ,ऐश्वर सब का दाता भी तू ही हैं ,,जो तेरा हैं वह तुझे ही 
अर्पित करता हूँ ,,ताकि मेरे अन्दर उत्पन्न होने वाले विकार स्वत:ही नष्ट 
हो जाए ,,किशोर श्री कृष्णा से शरद पूर्णिमा को देव रूपी गोप -गोपिका के 
रूप में प्रगटे महा तपस्वी साधू ,संतों ,साध्वी ,जो गाय और गवालन रूप में 
थे वे सभी ,मग्न होकर नाच गा रहे थे ,और ईश्वर श्री कृष्णा की आभा वर्षा में
वे अपना तन मन फिगों रहे हैं,,आओ इस शरद पूर्णिमा पर ॐ श्री राधे कृष्णा
के भाव में इस तन ,मन और आत्मा को तरबर कर लें ,
ॐ श्री राधे कृष्णा बोले ,राधे राधे