सोमवार, 25 जनवरी 2016
मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मूक समाज
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गुरुवार, 25 सितंबर 2014
; ; ; ; ; शक्ति जागरण -नवदुर्गा महापर्व ; ; ; ;
माँ ने हमें जन्म दिया और सदाचार्य का जीवन जीने की शैली भी हमें सिखाई हैं,हम भारतीय स्वभाव से सदा से ही आदर्शवादी रहे हैं ,माँ के बिना अवतार भी अपने जीवन की दिशा तय नहीं कर पाते तो हम साधारणजन के लिए यह असभव ही हैं,
जननी हमारी गुरु और मार्गदर्शिका होती हैं ,माँ का दर्जा ईश्वर से कभी भी कम नहीं हो सकता हैं ,आपको जीवन में कभी भी कठनाई आये तो एक नन्हे बच्चे की तरह माँ को याद करना समस्त शक्तियॉ आपके करीब होगी ,माँ तुम हो न ,,,,ॐ श्री राधे कृष्णा बोले ,,राधेराधे,,,सोमवार, 10 मार्च 2014
रविवार, 26 जनवरी 2014
आत्मा की दिव्य चेतना
ईश्वर से ज्यादा क्या अहंम और स्वार्थ है.....
ईश्वर
का यदि जीवन में किसी प्रिय की तरह प्रत्येक साँस के साथ पल प्रति पल
अहसास तो हो,किन्तु अहंम और स्वार्थ करीबी रिश्तेदार की तरह ,हर समय सिर्फ
बाधा ही उत्पन्न करते हो ,और हम उनके हाथ की कठपुतली ही बनकर रह जाते हैं , अपने (स्वार्थी
रिश्तेदार)के सहारे एक कदम भी चलने से मजबूर हो जाए तो एक दिखावटी भक्त की
तरह ही जीवन भर रहें आते हैं ,अपने जीवनपथ से अगर काँटे अलग नहीं कर पाते
तो हितो-उपदेश देने का भी हमारा कोई धर्माधिकार नहीं रह जाता हैं सदज्ञान
इसी को कहते हैं,ईश्वर हैं और अपने भक्तो के आभाचक्र की रक्षा करते रहते
हैं ,उनका (भक्तों )का जीवन ईश्वर के सहारे चलता रहता हैं ,ईश्वर सच्चे
मित्र की तरह कल्याण की आशा करते हैं ,सच्चे भक्त तो ईश्वर में ही लवलीन
रहते हैं ,ईश्वर की आभा का आभास और दर्शन तथागत और शंकराचार्य जी को घने
वन में बोधि वृक्ष के निचे हुआ ,संसार के सभी ज्योतिलिंग बोधिवृक्ष के साये
में ही स्वयं प्रगट हुए ,,ईश्वर को तो प्रकृति से ही लगाव हैं रजोगुणी
राजसी व्यवस्था ने उन पवित्र स्थानों मंदिर निर्मित कर अपना मान सम्मान
पाने की भरपूर चेष्टा की ईश्वर तो ममतामयी ,करुणामयी ,दयालु हैं ,कुपात्र
भी भोले भगवान् से वरदान पा जाते हैं ,ईश्वर हैं,शिव और शक्ति रूप में मेरे
कहने का आशय यही हैं कि उनमें स्त्री +पुरुष दोनों की आभा विराजमान
हैं,देवी को पत्ता हैं कि उनके भगवान के मन में क्या चल रहा हैं ,और भगवन
भी भगवती की भावना को भलीभांति समझते हैं दो शरीर होकर भी आत्मा से एक ही
रहते हैं ,आज भी कुछ समय पूर्व अद्भुत देवी-शक्ति भारत में प्रगट हुई हैं
,शारदादेवी +रामकृष्ण परमहंस ,श्रीराम शर्मा +भगवती देवी ,इन के दर्शन
मात्र से सुप्त शक्तियाँ जाग्रत हो जाती हैं ,मैं तो यही कहना चाहता हूँ कि
सभी धर्म का सम्मान करना चहिए ,इनका निर्माण परम पवित्र आत्मा ने किया हैं
,राजसी और तामसी प्रवृति के लोग अपनी अपनी समझ से स्वार्थपूर्ति के लिए
धर्म की दिशा बदलने की हमेशा बलवती चेष्टा किया करते हैं, जो भी हो हमें
पवित्र नदी की तरह मर्यादा में रहना चाहिए ,सत्य,अहिंसा,करुणा प्रेम,ममता
के सामने सभी हथियार कमजोर साबित होगेँ,,,कभी भी एक कठिन समय हमारे दरवाजे पर दस्तक दें सकता हैं,ॐ श्रीराधेकृष्ण बोले ,राधेराधे,,,
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013
महा रास लीला ॐ श्री राधे कृष्णा बोले
भगवान् श्री कृष्णा की सोलह कलाओं को लेकर आती हैं शरद पूर्णिमा
प्रतिदिन हम प्रार्थना में गाया करते हैं ,तन ,मन ,धन ,सब हैं तेरा क्या
लागे मेरा,,,इसका अर्थ यही हैं ,हे ईश्वर तू तो आत्मा में समाया हुआ हैं ,,
और ये शरीर ,मन ,ऐश्वर सब का दाता भी तू ही हैं ,,जो तेरा हैं वह तुझे ही
अर्पित करता हूँ ,,ताकि मेरे अन्दर उत्पन्न होने वाले विकार स्वत:ही नष्ट
हो जाए ,,किशोर श्री कृष्णा से शरद पूर्णिमा को देव रूपी गोप -गोपिका के
रूप में प्रगटे महा तपस्वी साधू ,संतों ,साध्वी ,जो गाय और गवालन रूप में
शनिवार, 9 मार्च 2013
omshri Radhe Radhe: ईश्वर एक हैं ,आदिकर्ता शिव अर्ध्दनारीश्वर स्वरूप ह...
omshri Radhe Radhe: ईश्वर एक हैं ,आदिकर्ता शिव अर्ध्दनारीश्वर स्वरूप ह...: ईश्वर एक हैं ,आदिकर्ता शिव अर्ध्दनारीश्वर स्वरूप है,, ॐ नम :शिवाय :अर्द्ध नारीश्वर प्रभु जिन्होंने माँ पिता दोंनों रूपों को अपने में ध...
ईश्वर एक हैं ,आदिकर्ता शिव अर्ध्दनारीश्वर स्वरूप है,,
ॐ नम :शिवाय :अर्द्ध नारीश्वर प्रभु जिन्होंने माँ पिता दोंनों रूपों को अपने में धारण किया हैं ,संसार के आदिकर्ता दैविक दैहिक रूप में एक हैं ,परमात्मा ही एकमात्र ऎसे हैं जिनमें देवी शक्ति निवास करती हैं
,ईश्वर के संसार जितने भी स्वरूप हैं ,उन सभी स्वरूपों देवी आभा उनको सदा अंगीकार किये हुयें हैं .
ॐ ॐ ॐ जाप से ही सभी मन्त्र की प्राप्ति हैं ,सत्यम शिवम सुन्दरम ,,,,,,,,,
शनिवार, 17 नवंबर 2012
ईश्वर हैं तो फिर ...
ईश्वर (भगवान् )वो परम पुरुष हैं ,जिन्हें केवल अनन्य भक्ति से ही पाया
जा सकता हैं ईश्वर हैं कहाँ और उन्हें कैसे पाया जा सकता हैं ?यह जिज्ञासा
सभी ज्ञानीजन के मन में रहती हैं ,यद्धपि उनका परम धाम हैं , फिर भी वे सृष्टि
की सूक्ष्म से भी सूक्ष्म में उपस्थित रहते हैं ,जब मन ,तन और आत्मा एकाकार
होते हैं ,तब सच्चे प्रेमी की तरह उनका ह्रदय में प्रवेश होता हैं ,जो भी कृष्ण विज्ञानं
(तत्व )से पूर्णतया अवगत हैं ,वह भक्त ही शुध्द भक्ति के कारण परमेश्वर को जान
पाता हैं ,और वह उस निर्गुण ब्रह्म में ही एकाकार होने लगता हैं,,OShri Radhe Krishna Bole...
की सूक्ष्म से भी सूक्ष्म में उपस्थित रहते हैं ,जब मन ,तन और आत्मा एकाकार
होते हैं ,तब सच्चे प्रेमी की तरह उनका ह्रदय में प्रवेश होता हैं ,जो भी कृष्ण विज्ञानं
(तत्व )से पूर्णतया अवगत हैं ,वह भक्त ही शुध्द भक्ति के कारण परमेश्वर को जान
पाता हैं ,और वह उस निर्गुण ब्रह्म में ही एकाकार होने लगता हैं,,OShri Radhe Krishna Bole...
शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
ईश्वर तो आत्मा तक पँहुच रखते हैं ,,,,,,
दुनिया ईश्वर पर शायद दिखावटी विश्वास करती हैं ,मानवता के लिए सभावित खतरे की अनदेखीकरते हुए न जाने प्रतिदिन कितने प्रयोग होते होगे ,जो सभी के स्वास्थ्य के लिए मीठे जहर जैसे हैं ,
हम प्रगतिवादी कहलाने की होड़ में नितं नए प्रयोग पर प्रयोग करते जा रहे हैं क्या हम सभी यह नहीं
जानते जंगल (वन )बगीचे में ,नदी ,तालाब ,गंदे पोखरों में तब्दील होते जा रहे हैं ,अरबों ,खरबों ,
की परियोजना बनती पर परिणाम शून्य ही रहता हैं,चिडियों की चहचाहट ,पक्षियों का करलव अब
सुनाई नहीं देता ,प्रयोग कीजिय किन्तु ये जहर को भूमि में गहराई में दफन कीजिये,,अगर मानवी
गलती से आपदा /विपदा का कहर देख रहें .तो इस का दोष उन नास्तिक के सर मढ़ना सीखिए जो
परिणामो की तह तक नही जा पाते हैं ,ईश्वर तो आपकी आत्मा के करीब हैं ,पुकार कर देखिए .
.ओ श्री राधे कृष्णा बोले ...
शनिवार, 27 अक्टूबर 2012
"Associating With God"O Shri Radhe Krishna Bole ,A Person who accepts the path of devotional service is not bereft of the results derived from studying the Vedas; performing austere sacrifices,giving charity,or pursuing philosophical and fruitive activities.At the end he reaches the supreme abode."Radhe Radhe Bole..
मंगलवार, 21 अगस्त 2012
Oshri Radhe Krishna Bolo
ईश्वर अगर आपको किसी गलत कार्यवाही करने से रोकते हैं तो क्या आप रूक जाते हैं ,आप अपनी आत्मा की आवाज की सदैव अवहेलना करते हो ,ईश्वर हैं यह बात आप के गले से नीचे नहीं उतरती हैं ,कभी माँ /पिता /गुरु के रूप ईश्वर आपको गलत दिशा में जाने से रोकते हैं ,वर्तमान में भले ही जो आपने किया वह आप और आपके मित्रों को सुखद लगे पर अन्त में उसकी ही बात आपको भली लगेगी ,,ओश्री राधे कृष्ण बोलो ,,,
शनिवार, 14 जुलाई 2012
Om Jai Jagdish Hare Aarti ( Udit Narayan & Sneha Pandit)
ॐ जय जगदीश हरे कह के तो देखे ,,बस प्रयास की ही जरूरत हैं ;;भगवान ह्रदय में प्रवेश करने लगेगें फिर कहना खोजो अराध्यय अंतरतम से ,जिन खोजा तिन पाहिया गहरे पानी पैठ ..खोजो विज्ञान की तरह सार्थक प्रयोग के माध्यम से खोजो ,ईश्वर भी यही चाहते हैं ,जैसा प्रयास महात्मा बुध्द ने किया ,तुम भी कर देखो .आत्मा से परमात्मा की डोर बंधी हैं ,बस छोर चाहिए ,,फिर मिलते हैं राधे राधे ,,,
गुरुवार, 12 जुलाई 2012
God is and God say ,,,,
ईश्वर पर विश्वाष करने वाला कभी भी जीवन में हार नहीं मानता ,भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा भी हैं ....
- मैं समस्त आध्यात्मिक तथा भौतिक जगतों का कारण हूँ ,प्रत्येक वस्तु मुझ ही से उदभूत हैं !जो बुध्दिमान यह भलीभाँति जानते हैं ,वे मेरी प्रेमाभक्ति में लगते हैं तथा ह्रदय से ही पूरी तरह मेरी पूजा में तत्पर होते हैं !मेरे शुध्द भक्तों के विचार मुझमें वास करते हैं ,उनके जीवन मेरी सेवा में अर्पित रहते हैं और वे एक दूसरे को ज्ञान प्रदान करते तथा मेरे विषय में बातें करते हुए परम संतोष तथा आनन्द का अनुभव करते हैं ,
- मैं समस्त आध्यात्मिक तथा भौतिक जगतों का कारण हूँ ,प्रत्येक वस्तु मुझ ही से उदभूत हैं !जो बुध्दिमान यह भलीभाँति जानते हैं ,वे मेरी प्रेमाभक्ति में लगते हैं तथा ह्रदय से ही पूरी तरह मेरी पूजा में तत्पर होते हैं !मेरे शुध्द भक्तों के विचार मुझमें वास करते हैं ,उनके जीवन मेरी सेवा में अर्पित रहते हैं और वे एक दूसरे को ज्ञान प्रदान करते तथा मेरे विषय में बातें करते हुए परम संतोष तथा आनन्द का अनुभव करते हैं ,
बुधवार, 4 जुलाई 2012
शुक्रवार, 25 मई 2012
omshri Radhe Radhe: माँ तो प्रकृति की हर संपदा में विधमान हैं ,,,, ...
omshri Radhe Radhe: माँ तो प्रकृति की हर संपदा में विधमान हैं ,,,, ...: माँ तो प्रकृति की हर संपदा में विधमान हैं ,,,, तू और मैं बस न जाने क्यों दूसरों कि बातो में , अपने...
माँ तो प्रकृति की हर संपदा में विधमान हैं ,,,,
तू और मैं बस न जाने क्यों दूसरों कि बातो में ,
अपने ही हाथो से अपने ही घर को खोदने लगते हैं
हम सोचते हैं कौन हैं हमे देखने वाला हमे रोकने वाला माँ
माँ तो दुनिया छोडकर चली गई पर भाई माँ हैं ...
प्रकृति की हर संपदा में विधमान हैं ..भाई माँ माँ हैं वो
आज भी कल भी होगी क्योकि वो माँ हैं माँ
वो सिर्फ देना जानती हैं माँ को जानो तब ही
प्रकृति को भी जान पाओ गे माँ तुम हो न
रविवार, 29 अप्रैल 2012
omshri Radhe Radhe: aatma hi pramatma kya yah saty hai?
omshri Radhe Radhe: aatma hi pramatma kya yah saty hai?: आत्मा ही परमात्मा है .क्या यह सत्य है ?,,,,
शनिवार, 28 अप्रैल 2012
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